Human Desire
जीवन को समान रूप से गतिमान करती है, ज्ञात तथा अज्ञात इच्छाएं। ज्ञात इच्छाएं सिमित होती है परंतु अज्ञात इच्छाएं असिमित होती है।यहीं बाधित होने पर किसी न किसी रूप में प्रकाशित होती है।
अचानक से किसी समस्या का हल निकालना या किताब पढ़ते पढ़ते पान चबा लेना या फिर अचानक ही कोई क्राइम कर देना।
ये अज्ञात इच्छाओं के कारण ही होता है। ये इच्छाएं कई जन्मों संस्कारों के रूप में पड़ी हमारे कर्मों की ही अनुभूतियां है जो समय-समय पर जाग्रत चेतना पर आती है।
स्वप्न भी इन्हीं इच्छाओं का कारण है।

Wowww beautifully written!♥️✨
ReplyDeleteThank you ❤️☺️
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