बदलते समिकरण:रूस, अमेरिका, भारत तथा चाइना
बदलते समिकरण: रूस ,अमेरिका, भारत तथा चाइना
वर्तमान की ऐसी घटनाएं हो रही है जिससे दुनिया के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इन घटनाओं के बारे में पहले हम थोड़ा सा जान देते हैं -
# रूस-
रूस यूक्रेन युद्ध जिसमें दोनों ही देशों की बर्बादी दिख रही है। कोई भी युद्ध मानवता के लिए हितकारी नहीं हो सकता।
रूस से पश्चिमी देशों ने राजनीतिक संबंध समाप्त कर लिए हैं तथा कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए जिससे प्रारंभ में रसिया की करंसी रूबल गिर रहा थी। युद्ध के चलते उसकी बड़ी रणनीति यह रही कि उसने अपने निर्यातक देशों से रूसी करंसी में डील करना शुरू कर दिया जिससे रूबल मजबूत हुई इसी दिशा में चाइना भी चाइनीस करेंसी में सऊदी अरब के कच्चे तेल का सौदा करने की पहल कर रहा है भारत से भी इसी प्रकार की डील हो सकती है यूएसए के दुश्मन इराक ने भी बिना अमेरिकी डॉलर को यूज करें खुद की करेंसी में डील करने की ओर कदम बढ़ा रहा है आर्थिक बदलाव अमेरिका की चिंता के लिए खतरा हो सकता है।
# चाइना
ग्लोबल टाइम न्यूज़ पेपर में जारी एक लेख के अनुसार यदि अमेरिका तथा चीन में युद्ध होता है तो चीन ही जीतेगा ग्लोबल टाइम में इस न्यूज़ का मतलब चीन सरकार द्वारा दिया गया बयान माना जाता है।
चाइना के लिए ताइवान महत्वपूर्ण है रूस यूक्रेन युद्ध में वह रुस को अप्रत्यक्ष रूप से सपोर्ट कर रहा है। अमेरिका के विरोध में वह शुरू से ही है यह स्पष्ट उसने कर दिया है ।चाइना ताइवान पर कब्जा करना चाहता है।पर ताइवान पालीसी के अनुसार यदि युद्ध होता है तो चाइना को पहले यूएसए से युद्ध करना पड़ेगा।
# भारत
अमेरिका भारत पर बार - बार फोर्स बना रहा है कि वह रुस पर हथियार, तेल, गैस आदि की डिपेंडेंसी को कम करें। पर भारत दोनों में किसी को भी नाराज नहीं कर सकता । इसलिए भारत तटस्थ रहने की कोशिश कर रहा है। किसी भी परिस्थिति में भारत चाइना युद्ध की स्थिति बनती है तब उसके रुस तथा युएसए दोनों से दुश्मनी महंगी पड़ सकती है।
पूरी दुनिया हथियार पश्चिमी देशों की तुलना में सस्ता देता है भारत को रूस ने 1963 में पहला मिग फाइटर विमान मिला था। इसके बाद लगातार दोनों देशों के संबंध मजबूत हुए हैं sukhoi-30 आदि शामिल है एक रिपोर्ट के अनुसार भारत को 2021 तक 70 बिलीयन डालर के हथियार दे चुका है।
# युएसए
नाटो के सदस्य देश एक- दुसरे सैन्य मदद प्रोवाइड करवाते हैं। नाटो के एक सदस्य पर हमला नाटो के सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है ।ऐसी स्थिति में रूस का यूक्रेन को नाटो का सदस्य ना बनने का युद्ध स्तरीय प्रयास अमेरिका के लिए एक चुनौती है।
रुस के विरोध में यदि युद्ध में उतरता है तो चाइना भी निश्चित रूप से युद्ध में उतरेगा। वह ताइवान जितना चाहता है यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं ।
क्या यह तीसरे वर्ल्ड वार के संकेत हैं ।एसे समीकरण बन रहे हैं कि यह संघर्ष इतना जल्दी खत्म होता नहीं दिख रहा है। क्या आर्थिक बदलाव अमेरिका के विरोध में होंगे?
युएसए युद्ध को समाप्त करते हुए भी नहीं दिखाई दे रहा है जिस प्रकार पूरा यूरोप भय में है कहीं न कहीं अपनी सेना तथा हथियारों में वृद्धि कर रहा है। ऐसे में इन हथियारों का प्रमुख निर्यातक देश यूएसए ही है इतने बड़े फायदे कोई वह कैसे नजरअंदाज नहीं कर सकता ?
संघर्ष समाप्ति पर क्या होगी रणनीतियां? कौन शक्ति शाली बनकर उभरेगी ?
रसिया फेडरेशन चार्ट :
12/6/1990
यह रसिया का चार्ट है।
23/9/2005 से रसिया को राहु की दशा मिली।राहु पंचम भाव मे पंचमेश/षष्ठेश-शनि, एकादशेश -चंद्रमां से युति में है।यह एक उन्माद योग है,विष योग भी है।षष्ठेश तथा एकादशेश की युति ने जलेषी, उन्माद, महत्वाकांक्षी तथा कहीं न कहीं एक ध्रुवीय केंद्रिकरण ने रुस को, वहां की जनता को गिल्ट भी दिया।इस योग के सकारात्मक बिन्दु ये है कि अविष्कार,खोज तथा हथियारों से धन प्राप्ति साधन भी दिया। यह युति मकर राशि में आइल ,गेस के लिए उत्तम है।
सप्तम भाव में मंगल है जो तृतीयेश व अष्टमेश है,यह बॉर्डर पर युद्ध तथा पड़ोसी राज्यों से अच्छे संबंधों को नहीं दिखा रहा है।
युद्ध की स्थिति यूक्रेन के साथ युद्ध 23 फरवरी 2022 को शुरू हुआ। तब दशा- राहु /चंद्र/ मंगल की थी।राहु/ मंगल की दशा अभी सितंबर 2022 से शुरू होगी जो भयंकर स्वरूप को दिखा रही है। पड़ोसी राज्यों से युद्ध , तनाव, संकट को दिखा रही हैं।गलत निर्णयों से आंतरिक तनाव को भी इंगित करती है। इसके बाद सितंबर 2023 से बृहस्पति की दशा शुरू होगी रुस की कुंडली का चतुर्थेश - सप्तमेश होकर दशम भाव में स्थित है।भूसंपदा में वृद्धि , शांति , जनता में खुशहाली के साथ विश्व के समक्ष स्वयं की साफ -सुथरी छवि को भी इंगित कर रहा है।यह मंगल से भी दृष्ट है जो विश्व स्तरीय शक्ति के स्वरूप को भी इंगित करता है।
कुंभ की दशा एक वर्ष की है जो जून 2022 से प्रारंभ हो रही है यह भी अच्छी परिस्थितियों को इंगित नहीं कर रही है।मीन की दशा 2023 जुन से प्रारम्भ होगी प्रशासन तथा जनता दोनों के लिए उत्तम है।
युद्ध लम्बा खींच सकता है या फिर रुस आंतरिक संकटों से घिर सकता है। सितम्बर 2023 से रुस की राहें आसान बनती दिख रही है।
कृपया जुड़े रहे शेष भाग अगले ब्लॉग में....

Amazing!����
ReplyDeleteThank you ❤️
DeleteNice
ReplyDeleteThank you 😊❤️
DeleteNicely elaborated
ReplyDeleteThank you ☺️
DeleteUttam Vishleshan ji. Bhaja bhaut badiya hai ����
ReplyDeleteThank you sir 😊🙏
DeleteOutstanding...
ReplyDeleteThank you ❤️😌
Delete