बदलते समिकरण:रूस, अमेरिका, चाइना तथा-3 भारत
बदलते समिकरण: रूस ,अमेरिका, भारत तथा चाइना-3
चाइना
ग्लोबल टाइम न्यूज़ पेपर में जारी एक लेख के अनुसार यदि अमेरिका तथा चीन में युद्ध होता है तो चीन ही जीतेगा ग्लोबल टाइम में इस न्यूज़ का मतलब चीन सरकार द्वारा दिया गया बयान माना जाता है।
चाइना के लिए ताइवान महत्वपूर्ण है रूस यूक्रेन युद्ध में वह रुस को अप्रत्यक्ष रूप से सपोर्ट कर रहा है। अमेरिका के विरोध में वह शुरू से ही है यह स्पष्ट उसने कर दिया है ।चाइना ताइवान पर कब्जा करना चाहता है।पर ताइवान पालीसी के अनुसार यदि युद्ध होता है तो चाइना को पहले यूएसए से युद्ध करना पड़ेगा।
चाइना चार्ट
1/10/1949
चाइना की कुंडली में लग्नेश अष्टम भाव में है स्पष्टत जो राष्ट्र की नीतियों तथा देश में होने वाले क्रियाकलापों को सदैव छिपा कर रखने की प्रवृत्ति उत्पन्न करता है। शनि पर द्वादशेष की दृष्टि जनता के स्वास्थ्य को भी कमजोर करती है। द्वादशेष के रूप में बृहस्पति द्वितीयेश को दृष्ट कर विदेशी व्यापार को उत्तम करता है।
तृतीयेश तथा द्वादशेष बली होना विदेशी व्यापार के लिए उत्तम है।
चतुर्थेश-एकादशेश मंगल सप्तमेश चंद्र से परस्पर दृष्टि संबंध में है प्रास्पेरिटी दिखाने के साथ विदेशी व्यापार के लिए भी उत्तम है।
मंगल का सप्तम भाव में स्थित होना वार को इंगित करता है। भारत -चीन युद्ध 1962 में भी मंगल /शनि की दशा ही थी।
चाइना की कुंडली में एक अन्य योग यह है कि तृतीय भाव में राहु तथा उस पर षष्ठेश -अष्टमेश की ही दृष्टि है जो चीन की सीमा से लगे देशों के संबंधों को अच्छा नहीं दिखाता है। कभी भी नियमों को तोड़कर सीमा पर तनाव निर्मित कर देता है।
यह योग विदेश नीतियों के प्रति भी अपमानजनक तथा धोखा देने की प्रवृत्ति देता है । कभी भी नियमों को तोड़कर एक्शन ले लेता है।
दशमेश दशम भाव में जीस पर मंगल की दृष्टि है जो एकादशेश-चतुचर्थेश है जो समृद्धि तथा लाभ के लिए अच्छा योग निर्मित करता है। कहीं न कहीं यह आटोक्रेसी (निरंकुशता) को भी दिखाता है।
वर्तमान में बुध की महादशा चल रही है जो षष्ठेश है तथा अष्टमेश से युत होकर नवम भाव में है ,जो विदेशी नीतियों के विरुद्ध कार्य करना, विदेशी कानून तोड़ना, संधियों का ईमानदारी से पालन न करना दिखाता है ।
यह युति तीसरे घर को भी दृष्ट कर रही है। सीमा विवाद द्वारा छोटे-मोटे युद्ध की स्थिति को भी इंगित करती है।इस युति पर मंगल की दृष्टि का अभाव है तथा सप्तम भावेश की युति -दृष्टि का अभाव है अतः विशाल स्तर पर चीन का युद्ध में शामिल होने की रणनीति फिलहाल नहीं है।नवांश में भी तृतीयेश-षष्ठेश होकर चतुर्थ भाव में मंगल से दृष्ट है जिसका तात्पर्य आंतरिक अशांति , पीड़ा के अलावा सीमा विवाद को इंगित करता है।
घर दशा वृषभ की चल रही है।से पंचम में ज्ञाती कारक टाक्सिक मानसिकता दिखा रहा है। तथा सप्तम भाव पर दारा कारक तथा भात्र कारक की दृष्टि कहीं न कहीं व्यापार में फायदा व मंगल की दृष्टि आंतक निर्मित करती है।
स्पष्टत चीन यहां बड़े युद्ध की रणनीति की बजाय सीमा से जुड़े देशों से मतभेद का छोटी-बड़ी झड़प तथा तनाव को बनाये रखने की रणनीति को दिखा रहा है।

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