बदलते समिकरण:रूस, अमेरिका, भारत तथा चाइना भाग -2
यूएसए चार्ट
4/7/1776 फिलाडेल्फिया
- अमेरिका यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका का चार्ट है। एकादश भाव में चार ग्रह है। अमेरिका की रणनीति भी सदैव अपने फायदे की ज्यादा रही। द्वितीयेश-एकादशेश द्वादश भाव में राहु से युत है जो बाहरी देशों से फायदे के साथ उन पर धन का व्यय भी दिखा रही हैं।
- प्रथम विश्व युद्ध 28/7/1914 - 11/11/1918 तक चला। युएसए मित्र देशों बेल्जियम, फ्रांस, ग्रेट ब्रिटेन, ग्रीस, इटली, मोटे ग्रे ,पुर्तगाल ,रोमानिया, रूस ,सर्बिया के साथ था। वही विरुद्ध देश अर्थात केंद्रीय शक्तियां थी- जर्मनी, ऑस्ट्रिया ,हंगरी ,ऑटोमन साम्राज्य और बुल्गारिया रहे।
- अमेरिका 1917 में प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुआ उस समय दशा थी -गुरु /गुरु जो किसी भी तरह से अमेरिका की हानी को नहीं दिखा रहा है।
- द्वितीय विश्वयुद्ध 1939 से 1945 तक इस युद्ध में जर्मनी इटली जापान तथा मित्र राष्ट्रों फ्रांस ब्रिटेन यूएसए , सोवियत संघ के मध्य चला।यह युद्ध छ: वर्ष तक चला।
- प्रथम विश्वयुद्ध में हुई वर्साय की संधि इस युद्ध का मुख्य कारण रही।
- कमेरिका ने सेकंड वर्ल्ड वॉर में प्रवेश 1942 में किया।दशा - शनि/सूर्य। अगस्त 1945 में परमाणु बाॅम को प्रयोग किया दशा शनि/मंगल की मिली।
- शनि षष्ठेश होकर मंगल से परस्पर दृष्टि संबंध में है।अंतर दशा नाथ मंगल षष्ठेश तथा षष्ठ भाव स्थित केतु को दृष्ट कर रहा है।
- महादशा नाथ बुध तथा केतु दोनों ही 6/12 अक्ष शीत युद्ध को स्पष्ट करते हैं।
- दशमेश-तृतीयेश शुक्र की महादशा ने वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा ।आने वाली दशा लग्नेश सूर्य की मिली जो बृहस्पति तथा मंगल से युत होकर एकादश भाव में महाशक्ति तथा बहु संपन्न राज्य के रूप में स्थापित कर दिया। वर्तमान में अमेरिका की बारहवें भाव में स्थित राहु की दशा चल रही है जो बहुत अच्छी नहीं है।
- रूस-यूक्रेन युद्ध के समय(23/2/2022 )अमेरिका की दशा - राहु/गुरु यह दशा 2023 तक है।यह दशा दबाव में आकर किसी गलत निर्णय को इंगित करती है।जिसकी भरपाई आगे आने वाली दशा में चुकानी पड़ेगी।
आगे आने वाली दशा - राहु/शनि
- यह दशा युएसए के लिए ठीक नहीं है। शनि षष्ठेश- सप्तमेश है मंगल से दृष्ट है। अंतरराष्ट्रीय तनाव को तथा युद्ध जैसी स्थिति निर्मित करतीं हैं।
- कहीं न कहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान सम्मान में कमी, संघर्ष को दिखाती है।
- यह दशा युएसए को आर्थिक झटका भी दे सकतीं हैं।
कुंभ की दशा (4/7/2021 -4/7/2028) जो लग्न तथा कारकांश लग्न से सप्तम भाव की दशा है। जिसमें ज्ञाती कारक स्थित है जो पुत्र कारक तथा राहु से परस्पर दृष्टि संबंध में है।गलत प्लानिंग को बताती है।
- भात्र,मात्र, अमात्य कारक की स्थिति पंचम भाव में है जो ज्यादा से ज्यादा लाभ तथा प्रतिष्ठा को बनाए रखने के प्रयास को इंगित करती है परन्तु आत्म कारक की स्थिति उत्तम नहीं है।
- वृषभ का अंतर 3/9/2022 से प्रारंभ होगा जो आत्म सम्मान की लड़ाई को दिखाता है। यहां से ज्ञाती कारक दशम भाव में तथा आत्म कारक पंचम भाव में स्थित है।
बदलते समिकरण में अमेरिका अपनी स्थिति को बनाए रखने के लिए उसके संघर्ष को दिखाती है ।
शेष भाग अगले ब्लॉग में...

Beautifully analysed!✨
ReplyDeleteThank you 😊❤️
DeleteBahut shandar
ReplyDeleteप्रतिक्रिया के लिए साधुवाद
Delete❤️❤️
Well explained
ReplyDeleteThank you ❤️😊🙏
DeleteNice interpretation
ReplyDeleteThank you 😌
Deleteप्रतिक्रिया के लिए साधुवाद
🙏🙏