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मंगल का राशि परिवर्तन

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  मंगल का राशि परिवर्तन : मंगल सिंह राशि में 1 जुलाई से 19 अगस्त 2023 तक रहेगा। मंगल अपनी नीच राशि को छोड़कर अतिमित्र राशि सिंह में गोचर करेगा। अग्नि तत्व राशि में गोचर मंगल की प्रचंडता को बढ़ाता है। भविष्य फल भास्कर के अनुसार मंगल का सिंह राशि पर गोचर होने पर सोना, चांदी, तांबा और लाल रंग की सब वस्तुएं महंगी होगी। भविष्य फल भास्कर ने नक्षत्रों पर गोचर के बारे में कहा है -  मघा नक्षत्र पर गोचर के दौरान तिल, उड़द,मूंग का नाश हो, धान्य दूर्लभ हो । पू. फा. नक्षत्र पर गोचर के समय थोड़ी वर्षा, प्रजा में कष्ट,तेल का अभाव।उ. फा. नक्षत्र के गोचर के समय थोड़ी वर्षा, पशुओं का नाश की बात कही है।      ## इस समय मंगल शनि से समसप्तक तथा राहु गुरु की युति से त्रिकोणीय संबंध बनाएंगे। राशि परिवर्तन के समय मेष लग्न उदित हो रहा है। जहां से ग्रहो की स्थितियां बड़े परिवर्तन को इंगित करती है।यहां मंगल पर शनि तथा बृहस्पति दोनों की दृष्टि होगी। नरेन्द्र मोदी जी की कुंडली में मंगल का गोचर दशम भाव में नेटल शनि पर तथा नेटल बृहस्पति को दृष्ट करेगा। दशा मंगल/शनि/बुध की होगी। ...

प्रतिभा को पहचानें

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  प्रतिभा को जानना ही सफलता की पहली सीढ़ी है।            यह भी उतना ही सच है कि व्यक्ति सभी कार्य करने में सक्षम नहीं है परंतु किसी भी एक कार्य को वह बड़ी कुशलता से कर सकता है यही प्रतीभा है । यहां अल्बर्ट आइंस्टीन की बात ज्यादा तर्कसंगत जान पड़ती है ।इनके अनुसार "हर व्यक्ति प्रतिभाशाली है लेकिन आप मछली का मूल्यांकन अगर पेड़ पर चढ़ने की उसकी योग्यता से करेंगे तो वह अपनी पूरी जिंदगी इस यक़ीन के साथ जिएगी कि वह मूर्ख है।"                      प्रतिभा ईश्वर द्वारा प्रदत्त गुण है जो हर व्यक्ति में किसी न किसी रूप में विद्यमान होता है। कुछ व्यक्ति पूरी जिंदगी उस प्रतिभा को जान ही नहीं पाते तथा दूसरी ओर व्यक्ति भाग्य के अनुसार जो मिला उसे स्वीकार करते रहते हैं। यदि वे सफल होते रहते हैं तो शायद कभी जानने का प्रयास भी नहीं करते कि उनमें क्या खूबी है? परन्तु जैसे ही कोई असफल होता है या किसी मुश्किल दौर में फंसता है। यहां से उसके आत्म...

क्या कहती है मिथुन संक्रांति

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  मिथुन संक्रांति : क्या ग्रह बना रहे हैं असंतुलन की स्थिति ? 15 जुन 2023 को शाम 6:17 मिनट पर सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश कर रहे हैं।इस समय वृश्चिक लग्न उदित हो रहा है। कुछ शुभाशुभ बिन्दु - # लग्नेश मंगल नीच के है। # चतुर्थ भाव में स्वग्रही शनि शुभ है उस पर मंगल की दृष्टि प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटनाओं का संकेत है। # दशमेश सूर्य का अष्टम भाव में होना सरकार की छवि में गिरावट के साथ कार्यों में बाधा का संकेत है। इस महीने ग्रहों के परिवर्तन भी कुछ ऐसे संकेत दे रहे हैं -  # शनि 18 जुन को 13°1' पर वक्री हो रहें हैं।23 जुन तक 13°0' पर ही रहेंगे। ठीक इसी समय 19 तथा 20 जून को बृहस्पति 12°56' तथा 13°7' पर शनि से सबसे सामीप्य स्थिति में होंगे। जो चतुर्थ तथा षष्ठ भावों में है । आपदाओं तथा दुर्घटनाओं का संकेत दे रहे हैं। # 25 जून को बुध राशि परिवर्तन कर रहे है जो मिथुन में सूर्य से युति करेंगे। 28 जुन को सूर्य व शनि समान डिग्रियों पर गोचर करेंगे तथा दोनों राहु के नक्षत्र पर गोचर करेंगे। पुनः प्राकृतिक आपदाओं का संकेत है। # 23 जुन को राहु तथा सूर्य समान डिग्रियों पर गोचर करेंगे तथा शन...

ज्योतिष प्रत्यक्ष शास्त्र है

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  जैसा कि हमने ग्रहों की गोचरिय स्थिति से यह अनुमान लगाया था कि  6 मई से 5 जुलाई तक सावधान रहें।डिप्रेशन, संक्रामक रोग/करोना, कार्य में बाधाएं, परेशानियों तथा दुर्घटनाओं के योग बन रहे हैं। जिनकी कुण्डली में भी चंद्रमा पीड़ित हैं विशेष कर वे व्यक्ति ध्यान रखें। ज्येष्ठ प्रतिपदा यदि शनि वार को पड़े तो भविष्य फल भास्कर के अनुसार दुर्भिक्ष होवे,रोग पीड़ा तथा छत्र भंग आदि उपद्रवों का संकेत है। ये सभी बातें हम मेरे पहले ब्लॉग में बता चुके हैं। जानकारी हेतु इस पर क्लिक करें।https://draft.blogger.com/blog/statspost/all_time/5482570317694356951/3250814256847467942 2/6/2023 ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार की शाम तीन ट्रेनों के बीच भीषण हादसा हो गया. हादसे में 280 लोगों की मौत हो गई और 900 से अधिक घायल हो गए.साथ ही रेल मंत्री की रेप्यूटेशन दांव पर लगी है। जब हम 2/6/2023 शाम 7बजे के गोचर कुंडली का विश्लेषण करते हैं तो पाते हैं कि -1.हादसे के समय उदित लग्न वृश्चिक है तथा केंद्र में दो पाप ग्रह सूर्य, शनि है दोनों की दृष्टि लग्न पर है साथ ही चतुर्थ भाव अत्यधिक पीड़ित है। भारत की कुंडली का वृष...

कर्नाटक का राजनैतिक भविष्य:

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  कर्नाटक का राजनैतिक भविष्य: सिद्धारमैया की शपथग्रहण कुंडली - 20/5/2023 12:40 बेंगलुरु 36 वर्षो में पहली बार कांग्रेस को कर्नाटक में इतनी बड़ी जीत मिली है. कांग्रेस ने 136 सीटों पर जीत दर्ज की है, वहीं बीजेपी को 65 सीटें मिली हैं. जेडीएस को 19 सीटें और निर्दलियों को 4 सीटें मिली । 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78 और जनता दल सेक्युलर को 37 सीटों पर जीत मिली थी।        कर्नाटक में आधारभूत सेवाओं की कमी तथा  हाउस लोन से शिक्षित जनता काफी परेशान थी। कर्नाटक सरकार जीडीपी का एक बड़ा भाग लोन पे करने में यूज़ करती है।कोविड के बाद यह बढ़ गया।टेक्सेस से जो रेवेन्यू आता है उस रेवेन्यू का 15% कर्नाटक सरकार लोन कि किस्तो में लगाता है। आधारभूत सेवाओं पर सरकार कोई नहीं दे पा रही थी ।स्कुलिंग एज ग्रुप के बच्चे जिन्हें स्कुल जाना चाहिए वह भी अन्य राज्यों की तुलना में कम है। हाइटेक सिटी होने के बावजूद यहां पर प्राथमिक शिक्षा का भविष्य अन्य पिछड़े राज्यों से भी कम है। इन्हीं स्थानीय मुद्दों पर कांग्रेस ने चुनाव लडा़ परिणाम आपके सामने ह...

6मई से 5 जुलाई तक सावधान रहें।

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  6 मई से 5 जुलाई तक सावधान रहें।डिप्रेशन, संक्रामक रोग/करोना, कार्य में बाधाएं, परेशानियों तथा दुर्घटनाओं योग बन रहे हैं। जिनकी कुण्डली में भी चंद्रमा पीड़ित हैं विशेष कर वे व्यक्ति  भगवान शिव की आराधना करें। रुद्राष्टकम का पाठ तथा कृष्णा वासुदेवाय हरे परमात्मने प्रणत क्लेशनाशाय गोविंदाय नमः मंत्र का जाप करें। आप नव ग्रह स्त्रोत का पाठ भी कर सकते हैं। 🙏🙏 ज्येष्ठ प्रतिपदा यदि शनि वार को पड़े तो भविष्य फल भास्कर के अनुसार दुर्भिक्ष होवे,रोग पीड़ा तथा छत्र भंग आदि उपद्रवों का संकेत है। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष मई की 6 तारीख शनिवार से प्रारंभ हो रहा है। आगे ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा के दिन भी शनिवार है जिसे भी भविष्य फल भास्कर ने जनता को पीड़ा तथा छत्र भंग की बात कही है। साथ ही इस समय राहु बृहस्पति की युति  गुरु चांडाल योग का निर्माण करती है जिस पर शनि की दृष्टि। 18 जुन को शनि वक्री होगा। 11 मई को मंगल कर्क राशि में प्रवेश कर शनि से षडा़ष्टक स्थिति में है। भारत की दशा चंद्र/केतु की है। 5 जुलाई तक सावधान रहें।

स्वयं को जानो

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स्वयं को जानो       कभी-कभी ऐसा होता है  कि हमारा जीवन रुक-सा गया है या कई लोगों का जीवन एक पड़ाव पर आकर लक्ष्य विहीन हो गया तथा  कुछ को ऐसा लगता है कि वे जीवन जी नहीं रहे होते वरन काट रहे होते हैं।तो कई व्यक्ति जीवन को समाप्त करने जैसे पड़ाव पर आ  पहुंचते हैं कुछ व्यक्ति अपने कर्तव्य को पूरा करते-करते स्वयं जीना भूल जाते हैं तथा बदले में पाने वाले सम्मान से भी वंचित महसूस करते हैं।          जीवन दुखों ,खुशियों ,इच्छाओं के जालों से निर्मित है। हर जाल एक संबंध को निर्मित करता है  और हर संबंध दूसरे संबंध से प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा होता है।एक का असर दूसरे पर ठीक उसी प्रकार पड़ता है जैसे तरंग का अपने उद्भव से लेकर समापन तक गतिमान होकर एक निश्चित अवधि भाग को सक्रिय करना होता है।              मस्तिष्क तथा मन मिलकर स्वयं  की छवि को गढ़ने लगते हैं ।आप क्या है?और क्या दिखाना चाहते हैं, के बीच एक खाई को गढ़ देते हैं। यह ...

क्या कहती है हिन्दू नववर्ष कुंडली

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  हिंदू नववर्ष फल : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा चार्ट विक्रम संवत 2080का आ रम्भ 22 मार्च 2023 से हो रहा है। चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि के समय सूर्य और चंद्रमा के मीन राशि में सामान अंशों पर आने हिंदू नववर्ष की शुरुआत  होती है। इस वर्ष 21 मार्च को रात्रि 10 बजकर 53 मिनट पर सूर्य और चंद्रमा मीन राशि में सामान अंश पर होने से हिंदू नववर्ष की कुंडली इस वर्ष भारतीय समयानुसार वृश्चिक लग्न की बन रही है। बुधवार को प्रतिपदा उदया तिथि होने से आगामी वर्ष का राजा बुध होगा  तथा मंत्री शुक्र है।  शास्त्रीय मत तथा फल- आचार्य वराहमिहिर के अनुसार शनि का शतभिषा नक्षत्र पर गोचर डाॅक्टर,वैद्य तथा व्यापारी वर्ग के लिए कष्टकारी कहा है। शनि शतभिषा नक्षत्र पर मार्च 2023 से अप्रैल 2024 तक रहेगा। भविष्य फल भास्कर के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा में वृश्चिक लग्न उदित होने पर पश्चिम में दुर्भिक्ष हो, धातुओं में तेजी,तीन मास तक दुःख फिर सुख, मध्य देश में धान्य का नाश हो।  24 मार्च से पिंगल संवत्सर प्रारंभ होने से समाज तथा राजनीतिज्ञों में टकराव, आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि, प्रजा दुःखी रहे।...

गुरु चांडाल योग के प्रभाव

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  गुरु चांडाल योग: बृहस्पति मेष राशि में प्रवेश 22 अप्रैल 2023 को कर रहे हैं। मेष में पहले से ही राहु , सूर्य, बुध का गोचर है। राहु 29/11/2023 तक मेष में रहेंगे उसके बाद राहु का गोचर मीन में रहेगा। राहु अनैतिक कार्यो, मति भ्रम,सट्टा,लाटरी, साजिश, षड्यंत्र,धोखा आदि की प्रवृत्ति लिए होता है साथ ही अविष्कार, मिलावट,दो पदार्थ मिलाकर नए की रचना का अधिकार भी राहु के दायरे में आता है । बृहस्पति धर्म, संतान, संतोष, सुख, आनन्द, धन,संपदा,सत्य की पहचान, ज्ञान के कारक है । बृहस्पति राहु की युति के कारण गुरु चांडाल योग का निर्माण होता है। ज्योतिष शास्त्र में बताया है कि गुरु चांडाल योग अशुभ योग है। परंतु इसका अशुभ प्रभाव तब होता है जब इस युति पर पाप ग्रह की दृष्टि हो। यहां पर शनि की दृष्टि है। पिछली बार राहु मार्च 2016 में बृहस्पति के करीब से आए थे, हमने जेएनयू जैसे प्रमुख संस्थान में राष्ट्रीय विरोधी नारे देखें , राष्ट्र को क्रांतिकारी के रूप में ठगों से परिचित कराया गया था। इस साल मेष राशि में अग्नि तत्व में  यह युति है। भारत: भारत के संदर्भ में देखे तो यह भारत की कुंडली के द्वादश भ...

मायूसी एक बड़ी समस्या है,

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     मायूसी एक बड़ी समस्या है- मायूसी एक बड़ी समस्या है, मायूसी जब लंबी अवधि तक चलती है तो अवसाद (डिप्रेशन )का रुप ले लेती है। अवसाद समस्त मानसिक बीमारियों का जनक है। मायूसी के शिकार हर व्यक्ति होते हैं कोई ज्यादा तो कहीं कम, ज्योतिषी की दृष्टि से सामान्यतः मायूसी के शिकार वे व्यक्ति अधिक होते हैं जिनकी कुंडली में चंद्रमा जल तत्व तथा पृथ्वी तत्व राशि में स्थित होकर शनि से दृष्ट, युक्त होता है।साथ पंचम भाव हमारे इमोशन का भाव है यदि यह भी जल तत्व या पृथ्वी तत्व राशियों से युक्त है तो ऐसे व्यक्ति अधिक भावुक होते हैं। भावुक व्यक्ति प्रस्थितियो से अधिक जुड़ जाते है ।यह लगाव ही दुःख का कारण है इसके विपरित अग्नि तथा वायु तत्व राशियां जल्दी प्रतिक्रिया देती और जल्दी  किसी भी स्थिति से बाहर आ जाती है। इसलिए रिकवरी के लिए उत्तम होती है। यह भी सत्य है कि घनघोर मायूसी के बाद कहीं न कहीं एक आशा की किरण नजर आती है और व्यक्ति अपने कार्य में जुट जाता है । ज्योतिष में इसे शुभ प्रभाव कहा है। बृहस्पति की दृष्टि चंद्रमा तथा पंचम भाव पर हो तो जातक कहीं न कहीं उम्मीद वह उत...

जीवन एक यज्ञ है

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  जीवन एक यज्ञ है-         मनुष्य वर्षों से भोग की कामना के लिए हर तरफ प्रयास करता है।भोग  क्या है?एक तरह की भूख है। जहां जीवन है वहां भूख है जहां भूख है वहां भोजन है जहां भोजन है वहां संघर्ष है।यह संघर्ष ही हिंसा को जन्म देता है। हिंसा मात्र व्यक्तियों को पीड़ा पहुंचाने का काम नहीं करती है,वरन पेड़ों को काटना तथा कंक्रिट की इमारतें खड़ी करना नदियों को समाप्त करना भी है। यह हिंसा हमें दिखाई नहीं देती परंतु आने वाली पीढ़ियों  के लिए ख़तरनाक परिणाम देगी इसलिए हर हाल में स्वयं को नियंत्रित करना आवश्यक है। उचित प्रबंध के बिना यह जीवन पशु तुल्य है।            ईश्वर द्वारा निर्मित जगत में मनुष्य ही एकमात्र उच्च श्रेष्ठ अवस्था में है ।मनुष्य  पशुओं से भिन्न इसलिए है कि उसकी बुद्धि विकसित अवस्था में है ।उसे सोचने समझने की शक्ति अन्य सभी प्राणियों से ज्यादा मिली है। वह सुख-दुख की अवस्थाओं का अनुभव कर  सकता है।इस अनुभव की वजह से उसे उद्देश्य निर्धारण की शक्ति प्राप्त होती है। यह अनुभ...